शुक्रवार, 14 मई 2021

ईद मुबारक #Eidmubarak

 

झूठों को भी ईद मुबारक, सच्चों को भी ईद मुबारक।
धर्म नशे में डूबे हैं जो उन बच्चों को ईद मुबारक।।
मुख में राम बगल में छुरी धर्म ध्वजा जो थामे घूमें।
धर्म समझ न आता जिनको उनको भी हो ईद मुबारक।।

पंडों को भी ईद मुबारक, चच्चों को भी ईद मुबारक।
कल के पैदा नए-नए इन, बच्चों को भी ईद मुबारक।।
बात बात में तलवारों से एक दूसरे को जो काटें।
कटने वाले समझ न पाते, उन पगलों को ईद मुबारक।।

मंदिर वंही बनाते फिरते, उनको भी हो ईद मुबारक।
लाशों पर चुप हो जाते हैं, उनको भी हो ईद मुबारक।।
राजनीति की रोटी खातिर, दंगों को भड़का देते हैं।
भड़क भड़क के लड़ मरते हैं, भेड़ों को भी ईद मुबारक।।

#eidmubarak

©®योगेश योगी किसान
#काले_कानून_वापस_लो
#फसलों_के_फैसले_किसान_करेगा
#एमएसपी_गारंटी_कानून_चाहिए
#स्वामीनाथन_रिपोर्ट_लागू_करो
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#तीसरी_आजादी
#farmersprotest
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फ़ोटो-दैनिक भास्कर

बुधवार, 17 मार्च 2021

राष्ट्रवादी कोरोना

 

कोरोना ने सरकार को पत्र भेज कर कहा है कि वह सरकार का पूर्ण रूपेण समर्थन करता है, सरकार के हर फैसले को राष्ट्रवादी फैसला मानते हुए वह कदम से कदम मिलाकर साथ देगा, उसने तो ये तक कहा है कि यदि सरकार अपनी सहमति दे दे की   अब देश मे कोई चुनाव नहीं होंगे और वर्तमान सरकार ही अंतिम सरकार होगी तो वह भारत मे लोकडाउन के माध्यम से लोगों को डरा कर राष्ट्रवादी सर्टिफिकेट का प्रथम हकदार बनने का एक प्रयत्न कर सकता है। कोरोना ने अपने जारी किए गए एक नोटाराइज शपथ पत्र में यँहा तक बयान किया है कि कोरोना स्ट्रेन के द्वारा वह लोगों को भयभीत कर उनकी खटिया खड़ी और बिस्तर गोल कर सकता है। पत्रकार वार्ता के दौरान एक प्रश्न के जवाब में कि क्या कोरोना सरकार के साथ मिला हुआ है? पर उसने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सत्तर सालों में ऐसी राष्ट्रवादी सरकार पहली बार आई है जिसने रोजगार, व्यापार, किसानी, आमदानी आदि में इतनी तरक्की दी है जिसका वर्णन करने के लिए उसके आउटर सेल में शब्दकोश कम पड़ जायेंगे और सरकार ऐसे ही इन सबमे तरक्की करती रहे उसके लिए उसका सरकार के साथ गठजोड़ बना रहना नितान्त आवश्यक है। एक गोदी मीडिया के पत्रकार द्वारा प्रश्न पूछें जाने पर की क्या थाली ताली से उसकी आउटर सेल टूट गई है और कोरोना का वायरस निष्क्रिय हो गया है? का जवाब देते हुए उसने कहा कि वह एक राष्ट्रवादी वायरस है गौमूत्र, थाली, ताली आदि का सम्मान करता है और इतना सम्मान करता है कि इतने सारे लोगों का प्रेम देखते हुए उसने फैसला किया है कि अब वह भारत टाओबेट की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ करेगा। एक और सवाल की क्या उसने राष्ट्रवादी पार्टी जॉइन कर ली है का जवाब देते हुए उसने कहा कि यह अफवाह है और यह विरोधियों की साजिश है वह उसे बिना वैक्सीन के खत्म करने का नापाक षड्यंत्र रच रहे हैं जिसे किसी कीमत पर पूरा नहीं होने दिया जाएगा, इतना कहकर उसने नए राज्य के चुनावों पर अपनी रणनीति बनाने की बात कहते हुए  कमल के फूल के आकार वाले उडनखटोले में बैठ कर प्रस्थान कर लिया।

©®योगेश योगी किसान

शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

पुलवामा हमले पर

 जिन जवानों के लहू से रक्तरंजित हो धरा।

वो धरा एहसान उनका न चुका पाए कभी।।

ढूंढते थे दुश्मनों को सरहदों के पार हम।

अब मिले हैं वतन में ही दर्द किससे क्या कहें।।


एक के बदले दस सिर वाले जुमले अब बकवास हुए।

जिनके सर लाना था उनको उनके ही वो खास हुए।।

किसी ने बेटा किसी ने भाई किसी ने पति को खोया था।

उस दिन देश का बच्चा बच्चा खून के आँसू रोया था।।

कुछ हैवानों ने ताबूतों को वोटों में बदल दिया।

और शहीदों की थाती को हँसते हँसते निगल लिया।।

गर किसान के बेटे सोचो सीमा पर न जायेंगे।

क्या नेता व्यापारी मरने अपने पूत ले जाएंगे।। 

आखिर कब तक गद्दी खातिर ये जवान किसान मरें।

सत्ताओं को जिम्मा है पर घटिया सबसे काम करें।।

सच लिखने की हिम्मत मुझमें भले रासुका लग जाये।

कलम मेरी अधिकार लिखेगी सीने गोली चल जाये।।


पुलवामा में शहीद सभी 40 जवानों के चरणों मे शत शत नमन, हमले की ईमान वाली न्यायिक जाँच की आस में, साथ ही पैरामिलिट्री को मुँह से शहीद का दर्जा नहीं कागज में भी शहीद का दर्जा मिले।

🌾🌾🇮🇳🇮🇳


हम ही किसान हैं।

हम ही जवान हैं।।


©®योगेश योगी किसान


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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

सुने ले सत्ता कान खोलकर तुझे चेताने आये हैं

 

धरती पुत्र के दिल की पीड़ा तुझे दिखाने आए हैं।
सुन ले सत्ता कान खोलकर, तुझे चेताने आए हैं।।

कितने किस्से बोलो कह दें, सत्ता की नाकामी के।
सत्ता जाकर गोदी बैठी, अडानी अंबानी के।।
तीन कानूनों को तेरे हम, नहीं मानने वाले हैं।
हमने जग का पेट भरा है, सुन ले हिम्मतवाले हैं।।
कुम्भकर्ण सी निद्रा से हम तुझे जगाने आये हैं।
      सुन ले सत्ता कान.....

आज सड़क से अन्न का दाता, हक तुझसे है माँग रहा।
शर्म न आती इन पर कैनन, और बंदूकें तान रहा।।
गड्ढे ,फेंसिंग, और कंटीली, तारों को बुनवाया है।
बाप की हत्या खातिर उसके, बेटे तूने लगाया है।।
षड्यंत्री है बुद्धि तेरी यही बताने आये हैं।
  सुन ले सत्ता कान....

हम किसान हैं तुमने हमको, आतंकी परिभाषा दी।
सत्ता में आने से पहले, झूठी कई दिलासा दी।
राष्ट्रवाद का चोला ओढ़े, मनमर्जी को झोंक रहे।
उसी आग में अन्न के दाता, को ज़िंदा ही झोंक रहे।।
एमएसपी का एक्ट बनाओ ये समझाने आये हैं।
    सुन ले सत्ता कान...

मंदिर मस्जिद तुमको भाता, राजनीति बस इतनी हैं।
खुद के गिरेबान में झाँको, औक़ातें ही कितनी हैं।।
सत्ता की चाबी का ताला, धर्म की कुंजी से खोलो।
देश मे बाकी मरे सो मरता, उसपे न तुम कुछ बोलो।।
दोगलपन कितना है तुममें वही दिखाने आये हैं।
   सुन ले सत्ता कान.....

बार बार तो माफ किया है, अबकी ही इंसाफ मिले।
घाव किसानों के भर दे जो, हमको लिखित जवाब मिले।।
सारी फसलों की कीमत, अबसे तय स्वयं किसान करें।
एमएसपी से कम न बेंचे, अन्न का वो  सम्मान करें।।
अंतिम ये पैगाम हमारा तुम्हें सुनाने आये हैं।
    सुन ले सत्ता कान.....

अगर नहीं हो पाया ऐसा, जंग नई छिड़ जाएगी।
इन हिंदुस्तानी अंग्रेजों की, कब्रें खोदी जायेगीं।।
व्यापारी हम पर हावी हैं, और नहीं चल पाएगा।
आखिर हल का मालिक अपने, हल को कैसे पायेगा।।
छोड़ गुलामी व्यापारी की यही सिखाने आये हैं।
   सुनले सत्ता कान.....

©®योगेश योगी किसान

किसान आंदोलन 26 नवम्बर से ...के समर्थन में

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

काला गेँहू black wheat

 #


काले गेहूं के फायदें।

  आमतौर पर देश में लोकमन या शरबती गेहूं से बनी रोटी खाई जाती है। लेकिन, क्या आपको पता है गेहूं की एक वेरायटी काले गेहूं के रूप में भी आती है। काले गेहूं के आंटे से बनी चपाती का रंग भले ही देखने में काला व भूरा होने के कारण अलग लगता है, लेकिन ये सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसका स्वाद में भी कोई सानी नहीं है।

खासतौर पर सर्दियों में ये डॉइबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों के लिए बहुत लाभकारी होता है। सामान्य गेहूं के मुकाबले जहां इसमें एंटी ग्लूकोज तत्व ज्यादा होते हैं, जिसके कारण ये शुगर के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है, वहीं ये ब्लड सर्कुलेशन भी सामान्य बनाए रखता है, जिससे दिल भी स्वस्थ रहता है।


कई दवाओं से बचाता है काला गेहूं


वैसे तो काले गेहूं का सेवन हर मौसम में किया जा सकता है, क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सिडेंट्स तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आपको हर मौसम में फिट एंड हेल्दी रखता है। ऐसे में अगर आप दवाओं से बचे रहकर खुद को कई गंभीर और सामान्य बीमारियों से बचाए रखना चाहते हैं, तो नियमित रूप से काले गेहूं के आटे से बनी रोटी खा सकते हैं। तो आइए पहले जान लेते हैं क्या होता है काला गेहूं ? और क्या हैं इसके फायदे?


क्या हैं काले गेहूं ?


काला गेहूं , सामान्य दिखने वाले गेहूं की ही तरह एक अनाज होता है, जिसकी चपाती खाई जाती है। पंजाब के नाबी नामक एक इंस्टिट्यूट ने अपने 7 साल के लंबे रिसर्च के बाद इसकी खोज की है।


-दिल से रोगों को रखता है दूर


काले गेहूं का सेवन करने से दिल की बीमारियों के होने का खतरा कम होता है, क्योंकि काले गेहूं में ट्राइग्लिसराइड तत्व मौजूद होते हैं। इसके अलावा काले गेहूं में मौजूद मैग्नीशियम उच्च मात्रा में पाया जाता है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्राल का स्तर को सामान्य बना रहता है।


-कब्ज दूर करे


काले गेहूं का नियमित सेवन करने से शरीर को सही मात्रा में फाइबर प्राप्त होता है जिससे पेट के रोगों खासकर कब्ज में लाभ मिलता है।


-पेट के कैंसर में फायदा


काले गेहूं में मौजूद फाइबर से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पाचन संबंधी समस्याओं के अलावा पेट के कैंसर से भी निजात मिलती है।


-हाई ब्लड प्रेशर में लाभ


इसके नियमित सेवन करने से शरीर में उच्च कोलेस्ट्रॉल में उपयोगी होने के अलावा, उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर होता है


-डायबिटीज में असरदार


मधुमेह वाले लोगों के लिए सबसे उपयोगी होता है क्योंकि इसका सेवन करने से रक्त शर्करा यानि ब्लड शुगर को कम करने में मदद मिलती है।


-आंतों का इंफेक्शन करे खत्म


रोजाना काले गेहूं का अलग अलग रूपों में सेवन करने से शरीर में फाइबर का स्तर बेहतर होता है और आंतों के इंफेक्शन को ठीक करने में मदद मिलती है


-नए ऊतकों को बनाने में कागर


काले गेहूं में मौजूद जरूरी पौषक तत्वों में से एक फास्फोरस भी होता है, जो शरीर में नए ऊतकों को बनाने के साथ उनके रखरखाव में अहम भूमिका निभाता है जिससे शरीर सुचारु रुप से कार्य कर सके।


-एनीमिया


काले गेहूं में प्रोटीन, मैग्नीशियम के अलावा आयरन भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है । ऐसे में अगर आप रोजाना काले गेहूं का सेवन करते हैं, तो शरीर में रक्त की कमी यानि एनिमिया की बीमारी को दूर किया जा सकता है। इससे शरीर में आक्सीजन का स्तर सही रहता है।


-शरीर के विकास में मदद


काले गेहूं यानि साबुत अनाज में मैंगनीज उच्च मात्रा में पाया जाता है, मैंगनीज स्वस्थ चयापचय, विकास और शरीर के एंटीऑक्सिडेंट सुरक्षा के लिए आवश्यक भूमिका निभाता है।


-कोलेस्ट्राल को कम करता है


काले गेहूं में असंतृप्त वसीय अम्ल और फाइबर उच्च मात्रा में पाया जाता है। ऐसे नियमित रूप से काले गेहूं का सेवन तब उपयोगी होता है जब वे रक्त में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के उच्च स्तर पर मौजूद होते हैं। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में प्रभावी साबित होता।


-काले गेहूं के पौषक तत्व


साबुत अनाज में मौजूद पोषण मूल्य कई पके अनाजों की तुलना में काफी अधिक है। कच्चे अनाज की 3.5 औंस (100 ग्राम) में पोषण तथ्य होते हैं....


कैलोरी: 343


पानी: 10%


प्रोटीन: 13.3 ग्राम


कार्ब्स: 71.5 ग्राम


चीनी: 0 ग्राम


फाइबर: 10 ग्राम


वसा: 3.4 ग्राम


कार्बोहाइड्रेट


काले गेहूं का उपयोग


काले गेहूं का उपयोग अनाज चाय में किया जाता है या इसे ग्रेट्स, आटा और नूडल्स के रूप में प्रयोग किया जाता है। जबकि कई यूरोपीय और एशियाई देशो में पारंपरिक व्यंजनों में मुख्य पदार्थ यानि चावल के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। वर्तमान समय में देश में इसका उत्पादन अभी काफी कम है। बाजार में इसका औसत दाम ₹6000 प्रति क्विंटल से भी अधिक है।

©आवाज एक पहल

लवकुश


शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

गीत- मैं कोई कविता सुनाना चाहता हूं

मैं कोई कविता सुनाना चाहता हूं
भावना को गुनगुनाना चाहता हूँ

शारदे के वंसजों के बीच आकर
खुद को मैं भी आजमाना चाहता हूँ
छंद बिखरे शब्द बिखरे हों भले ही,
बात दिल की मैं बताना चाहता हूँ,
भावना को...

आईने मैंने बहुत देखे बिखरते,
टूटकर मैं अब निखरना चाहता हूँ,
चन्द आखर हों भले ही लाइनों में,
भाव से दिल में उतरना चाहता हूँ,
भावना को....

कलम का छोटा सिपाही हूँ बहुत ही,
उसकी इज़्ज़त मैं बचाना चाहता हूँ,
मंच वैभव की नहीं है भूख मुझको,
मैं दिलों में आसरा एक चाहता हूं,
भावना को....

मानता हूँ साधना आसां नही ये,
पर उसी में डूब जाना चाहता हूँ,
फक्र है मुझको भले ही चन्द सुनते,
बस उन्हीं को मैं सुनाना चाहता हूँ,
भावना को.....


©®योगेश योगी किसान
सर्वाधिकार सुरक्षित

घनाक्षरी छंद- किसान को समर्पित

घनाक्षरी छंद
*1*
अन्न उपजाता थाली खाली तेरी भरता है,
देश मे किसानों को सम्मान मिलना चाहिये,
जिसने भरा हो पेट सदा सारे भारत का,
उसपे भी हमें अभिमान होना चाहिये,
मंडी में क्यों दाम नहीं मिलते अनाज के हैं,
 सरकारी कोई इंतजाम होना चाहिए,
उपज का सही दाम मिल जाय बात बने,
मुँह पर ही नहीं जय किसान होना चाहिए,
*2*
बोलो जै जवानो की पर भूलों न किसानों की,
सीमा पर वीर वो तो देश की ये शान हैं,
एक को शहादत पे तिरंगा मिले अच्छी बात,
दूजे के कफन का नहीं कोई इंतजाम है,
करें व सुरक्षा तो किसान भूख हर रहे,
फिर क्यों सदा ही एक तरफा जय गान है,
अन्न उपजाना गर इसने भी छोड़ दिया,
सुने हिंदुस्तान सारा आफत में जान है,

*3*
डाल पर लटकी है लाश आज भारत की,
देश की हर उन्नति को मेरा धिक्कार है,
जीवन देने वाला रोज जीवन है हार रहा,
देश को किसानों से क्यों जरा सा न प्यार है,
राजनीति के ही कारण अन्नदाता मरता है,
जिसके लिए ये सारा देश ही व्यापार है,
सारी सुविधाएँ मिल जायें गर किसानों को तो,
देश की तरक्की फिर होनी चहुँद्वार है,

सर्वाधिकार सुरक्षित
©®योगेश योगी किसान

गीत- बहुत हो गई विनय हमारी

गीत-बहुत हो गईं विनय हमारी...

कान खोल कर सुन ले दिल्ली अब आवाज उठायेंगे
बहुत हो गई विनय हमारी,अब हथियार उठायेंगे,

रातों दिन की मेहनत का कुछ भी परिणाम नहीं मिलता
खून पसीने से उपजी फसलों का दाम नहीं मिलता,
हद से ज्यादा जुल्म तुम्हारा और नहीं सह पाएंगें,
बहुत जो गई विनय...

सवा अरब की भूख हरें हम खुद भूखे रह जाते हैं,
कर्जे में जीवन डूबा है जीते जी मार जाते हैं,
रोज-रोज मरने से अच्छा एक दिन ही मर जायेंगे,
बहुत हो गई...

नहीं माँगते यश, वैभव न सुख, सुविधाएँ हम चाहें,
फसल हमारी इज्जत है बस उसकी कीमत हम चाहें,
न दे पाए अब तक तुम, अब हम खुद तय कर जाएंगे,
बहुत हो गई विनय...

भूखे बच्चे बद से बदतर हालात न देखी जाती,
 फाँसी पर लटके किसान क्यों तुमको दया नहीं आती,
कसम खा रहे इन मौतों की अब चुप न रह पायेंगे,
बहुत हो गई विनय...

अभी वक्त है ठेकेदारों अंतिम ये पैगाम सुनो,
ये 'किसान' का संदेशा है बहुत बुरा अंजाम सुनो,
तेरे लहू से सींच धरा पर अगली फसल लगाएंगे,
बहुत हो गई विनय हमारी...


सर्वाधिकार सुरक्षित
©®योगेश योगी किसान

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

गीत- नदिया की महिमा समझाऊँ

गीत-नदिया की महिमा समझाऊँ

आओ तुमको गीत सुनाऊँ,
नदिया की महिमा बतलाऊँ,

जीवन की यह भाग्य विधाता,
जनम मरण से इसका नाता,
इसके जल से हरियाली है,
सारे जग में खुशहाली है,
कितने गुण मैं तुम्हें सुनाऊँ,
नदिया की....

कल-कल, छल-छल निर्मल बहता,
इसके जल से जीवन चलता,
अगर नहीं नदियाँ होतीं तो,
सारा जग ये बंजर होता है,
आज मगर हम भूल गए हैं,
अहंकार में डूब गए हैं,
जल की कीमत क्या समझाऊँ,
नदिया की...

आओ मिलकर इन्हें बचाएँ,
पर्यावरण का साथ निभाएँ,
जल को इनके साफ रखें हम,
प्रदूषण से इन्हें बचाएँ,
जल है तो कल तभी बचेगा,
अगला जीवन यही कहेगा,
बार-बार गुणगान मैं गाउँ,
नदिया की महिमा...


सर्वाधिकार सुरक्षित
©®योगेश योगी किसान

गीत - इस शहर में क्या है ऐसा

गीत- गाँव से जिंदा हो भाई

महुआ की खुशबू जँहा पर,
आम की है बौर आई,
इस शहर में क्या है ऐसा,
गाँव से जिंदा हो भाई,

नफरतों का घर तुम्हारा,
चाहतें बेघर जँहा पर,
शर्म से डूबे हैं रिश्ते,
वृद्ध आश्रम है वहाँ पर,
हमने रिश्तों को बाँधा,
प्रीत सदियों से निभाई,
इस शहर में क्या.....

लहलहाते खेत देखो,
पेट जो भरते तुम्हारे,
सींच कर अपनव लहू से,
शहर हमने हैं सँवारें,
तुमने दुत्कारा है हमको,
नफरतें हमसे निभाईं,
इस शहर में....


बिष न बोते खेत मे हम,
रिश्तों में रस घोलते हैं,
आँसू बेशक बह रहे हों,
फिर दिल से बोलते हैं,
नफरतें तुमने हैं बोईं,
प्रीत हमने है उगाई,
इस शहर में...

गाय गोबर हमको प्यारे,
खेत ईश्वर हैं हमारे,
चूमते हैं नित्य ही हम,
मिट्टी के ढ़ेलों को सारे,
धरती को माता कहा ये,
चलन हमने है चलाई,
इस शहर में ....

जहर बनता है शहर में,
मर रहे हैं गाँव वाले,
नदियों को दूषित हो करते,
छोड़ कर घर घर के नाले,
हमने पेड़ों को लगाया,
फैक्ट्रियाँ तुमने लगाईं,
इसज शहर में....

जिसको तुम कहते तरक्की,
वह प्रकृति से एक धोखा,
नित नए आयाम छूते,
इन सभी से क्या है होगा,
काटे हैं जंगल तुम्हीं ने,
खोदी तुमने गहरी खाई,
इस शहर में....


सर्वाधिकार सुरक्षित
©®योगेश योगी किसान

गीत-मैं किसान फिर भी लाचारी

गीत
मैं किसान फिर भी लाचारी

मेरे दुःख समझेगा कौन,
जब चंहुदिश दिखता है मौन,
सबका पेट भरा है मैंने,
मेरी हालत के क्या कहने,
नित नित बढ़ती है बेगारी,
मैं किसान.....

ईश्वर मुझसे रूठ गया है,
गठबंधन सा टूट गया है,
नदिया रूठी झरने रूठे,
 ताल तलैया कोने बैठे,
मेरी बिपदा सबसे भारी
मैं किसान फिर...

सबको भोजन मैं देता हूँ,
फिर भी मैं भूखा सोता हूँ,
तेरी खुशियाँ मेरे गम से,
सारी रौनक मेरे दम से,
नहीं कोई मेरा आभारी,
मैं किसान फिर...

सबको खुशियाँ मिले वतन में,
मैं रहता क्यों सदा पतन में,
जेवर बीबी के बिक जाते,
सीजन की जब फसल लागते,
लागत महँगी उपज बेचारी,
मैं किसान फिर...

कुर्सी में जो-जो हैं बैठे,
सत्ता पाकर मुझसे ऐंठे,
जिनको मतलब नहीं कृषक से,
न उनकी भारी पीड़ा से,
इंतजाम न कुछ सरकारी,
मैं किसान फिर...

हाथ करूँ बेटी के पीले,
इस चिंता में नयन हैं गीले,
बच्चे मेरे कब पढ़ जाएँ,
न जी पाएँ न मार पाएँ,
मेरी किस्मत ही क्यों खारी,
मैं किसान फिर.....

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©®योगेश योगी किसान

गीत- मैं किसान की कुर्बानी का

गीत
मैं किसान की कुर्बानी का

मैं किसान की कुर्बानी का गीत सुनाने आया हूँ।
उसकी मेहनत की पीड़ा मैं तुम्हें सुनाने आया हूँ।

जिसने सींचा हो खून से खेत और खलिहानों को।
जिसने अपना सारा जीवन पूरा सौंप दिया बलिदानों को।
उस किसान की मेहनत पर ईश्वर बीबी आघात करे।
सरकारों की जिम्मेदारी फिर उस पर प्रतिघात करे।
उसके पाँव पड़े छालों का दर्द सुनाने आया हूँ।
उसकी मेहनत....

रात-रात भर जग कर जिसने तुमको रोज सुलाया हो।
अपने कष्टों की पीड़ा को कभी नहीं बतलाया हो।
अपनी मेहनत के अनाज से पेट तुम्हारे भरता हो।
खुद भूखा रहकर भी सोचो कभी नहीं कुछ कहता हो।
उसके दर्दों का थोड़ा आभाष कराने आया हूँ।
उसकी मेहनत .....

बिन माँगे न हक मिलता हो माँगों तो गोली मिलती।
क्या किसान की मेहनत बोलो तुमको है इतनी खलती।
सीने में पीतल भर देते सरकारी सम्मानों का,
घूँट-घूँट वह रोज है पिता मिले हुए अपमानों का।
ईश्वर धरती का किसान है ये दिखलाने आया हूँ।
उसकी मेहनत ....

नहीं चाहिए भीख उसे बदले में चाहे अपमान मिलें।
पर उनकी जीवन की रेखा फसलों को सम्मान मिले।
उसकी फसल की कीमत के भी कुछ पैसे लग जाने दो।
बहुत पड़े हैं कर्जे उसके कुछ थोड़े चूक जाने दो।
फसलों की कीमत न मिलती यही बताने आया हूँ।
मैं किसान की....

©®योगेश योगी किसान
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गीत- शब्द नहीं कुछ कहने को

गीत
शब्द नहीं हैं कुछ कहने को

गीत

शब्द नहीं है कुछ कहने को

शब्द नहीं है कुछ कहने को उसकी पीड़ा भारी है।
कर्जे में है डूब चुका बस फाँसी की तैयारी है।।

देश के लोगों तुम भी सोचो उसके दाने खाते हो।
रात-रात भर वो जगता है तुम कैसे सो जाते हो।
उसके हक पर डाका क्यों है सत्ता क्यों हत्यारी है।
 शब्द नहीं है....

कँहा सोचता इतना वह है जितना तुम हो सोच रहे।
उसकी मेहनत की इज्जत की बोटी-बोटी नोंच रहे।
धरती से क्या भूमिपुत्र के गारत की तैयारी है।
शब्द नहीं हैं....

जरा सोच कर देखो तुम अन्न नहीं उपजायेगा।
चारों ओर चीत्कार मचेगी फिर भारत क्या खायेगा।
सबकी उन्नति दिखती है बस उसकी विपदा भारी है।
शब्द नहीं हैं....

ओला-पाला, धूप-छाँव, बारिश से वो लड़ लेता है।
घुटनो तक कीचड़ में रहकर फिर भी खुश हो लेता है।
फसलों के घटते दामो से उसकी हिम्मत हारी है।
शब्द नहीं हैं...

नहीं करोगे कभी तरक्की चाहे कितने जतन करो।
जो तुमको भोजन देता है उसकी पहले पीर हरो।
व्यापारी की चाँदी है, क्यों उसकी गर्दन पर आरी है।
शब्द नहीं हैं....

कहता 'किसान' हल को छोड़ा तो अन्न कौन उपजायेगा।
चंहुँदिश जँहा नजर जाएगी सब बंजर हो जाएगा।
उसके छालों को देखो जिससे रौनक ये जारी है।
शब्द नहीं हैं....

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©®योगेश योगी किसान

गीत - मैं किसान का बेटा हूँ

गीत

मैं किसान का बेटा हूँ

हाँ किसान का बेटा हूँ मैं दर्द उसी के गाता हूँ।
उसकी हालत देख कहूँ क्या आँसू से भर जाता हूँ।
तुमको बेशक महल मुबारक राजनीति की गद्दी भी।
गोली देते हक माँगों तो मंच से गाली भद्दी सी।।
मेरा तुम हो दाना खाते मैं तेरा क्या खाता हूँ,
मैं किसान का बेटा.....

क्या सोचा है कभी की उसका जीवन यापन कैसा है।
उसकी मेहनत उसकी हालत जीवन से  समझौता है।
मेहनत करता जब जगकर रात दिन परपाटी में।
उसके आँसू का कतरा फिर मिलता तुमको थाली में।
 जरा सोच लो क्यों इतराते खुशियाँ मैं ही लाता हूँ...
मैं किसान का बेटा....

मत भूलो की धरा पुत्र का तुमको जीवन देता है।
बदहाली सी खुशहाली में वह जीवन जी लेता है।
मैं किसान के दर्द समेटे उसका चारण करता हूँ।
उसकी मेहनत को शब्दों से में उच्चारण करता हूँ।
मेरे ही दुश्मन बन बैठे तुमको क्यों न भाता हूँ..
मैं किसान का....

एक दिन आकर उनके जैसी मेहनत गर तुम कर लोगे।
बिस्तर से   उठ पाओगे सब देवों को भज लोगे।
तुम हो नोटों के सौदागर नोटें खाकर रहते हो।
इसलिए मंचों से हमको बुरा भला तुम कहते हो।
गाली मुझको ही मिलती हैं इतना क्यों चुभ जाता हूँ..
मैं किसान का....

सुन ले भारत कान खोलकर भूमिपुत्र यदि रोयेगा।
कितनी चाहे केओ तरक्की अपने अतीत को खोएगा।
भारत माँ का बेटा यदि बलि की बेदी चढ़ जाएगा।
तुमको भोजन देने बोलो कौन पितामह आएगा।
हार मिले हरदम फिर भी मैं अगली फसल लगता हूँ।
मैं किसान....


सर्वाधिकार सुरक्षित
©® योगेश योगी किसान

गीत- लहलहाती फसल

%गीत%

लहलहाती फसल

लहलहाती फसल और ये ठंडी हवा ,
मेरे खेतों की खुशबू की क्या बात है,
आपके पेट का अन्न भोजन बना,
मेरे मेहनत के दानों को सौगात है,
लहलहाती फसल .....

रात दिन मैं जगा उसकी रखवाली में,
जिसका भोजन मिला आपकी थाली में,
मेरी मेहनत का ही सब कुछ परिणाम है,
मेरे दम से सुबह और ये शाम है,
लहलहाती फसल ......

जो भी दिखता यँहा मेरी मेहनत सभी,
ये तरक्की भी मेरी तरक्की से है,
भूल जाओगे गर तुम मेरी मेहनत को,
बस समझ लो की दुनिया ये बर्बाद है,
लहलहाती फसल.....

तुम भी मनो मुझे तुम भी जानो मुझे,
मेरी मेहनत के डीएम से सभी काज है,
आज के दौर की ये नुमाइश सभी ,
झोपडी भी मेरी , मेरे ये ताज हैं,
लहलहाती फसल ......

सर्वाधिकार सुरक्षित
©® योगेश योगी किसान

किसानों का दर्द समेटे मुक्तक

मुक्तक
किसानों की किसानी का कोई सानी नहीं जग में।
 इमां का खून बहता है कोई पानी नहीं रग में।
करोगे बेदखल हक से मिलोगे गर्त में सीधे।
है धरती का वह ईश्वर नहीं ईश्वर कोई नभ में।।

समेटे दर्द सीने में करे वो देश की सेवा।
उपज का मूल्य बस देदो नहीं चाहे कभी मेवा,
भले तुम ऐश की सारी हदों को पास में रख लो,
दे दो हक उसे उसका करें जो राष्ट्र की सेवा।।

सितम इतने हुए हम पर कहानी हालात कहती है।
हमारे खेत से नदिया हमेशा सूखी बहती है।
 भरे जो पेट जन जन का वही लाचार है भूखा।
तुम्हारे जुल्म की शोहरत यही हर बार कहती है।।

लहू के कतरे कतरे से फसल को सींचा है हमने।
मिला है भाव माटी सा खरीदा खरीदा हमसे है तुमने।
फसल इज्जत जो मेरी है लुटी है आज मंडी में।
हरे घावों की धरती पर नमक रगड़ा है फिर तुमने।।

करोगे जो कभी मेहनत किसानी जान जाओगे।
कटाई कर लो एकड़ भर तो हमको मान जाओगे।
चलाओ मुँह न मंचों से रहो औकात में अपनी।
दराती जो उठा ली तो हमें पहचान जाओगे।।

नहीं निकलेगा कोई हल अगर हल छोड़ जाएगा।
किसानी बंद कर देगा अगर मुख मोड़ जाएगा।
खनक सिक्कों की कैसे पेट को भरती बताओ तो।
रहेगी थाल फिर खाली जो नाता तोड़ जाएगा।।

पढूंगा दर्द ईश्वर का कहूँगा दर्द ईश्वर का।
नहीं निकला है अब तक हल लिखूँगा मर्ज ईश्वर का।।
किसानों को न मारो तुम सुनो सत्ता के वाशिंदों।
इबादत में करो शामिल जरा सा अर्क ईश्वर का।।

समंदर है बहुत गहरा ये आँसू हैं किसानो के।
तुम्हारे पेट को पाले ये जज़्बे हम दीवानो के।।
कभी भड़की अगन हक की चिताएँ गिन न पाओगे।
ठिकाने ये लगा देंगे वतन के बेईमानों के।।

करे दिन रात रखवाली तुम्हारे  पेट भरने को।
बुरे हालात हैं उसके न साँसे ज़िंदा रहने को।
लगेगी हाय ऐसी की कभी खुश रह न पाओगे।
करो तो काम तुम कुछ ऐसे कृषक की पीर हरने को।।

चलो मैं गीत लिखता हूँ खुशी के साथ गाऊँगा।
तेरे चारण में गाकर के खुशी से झूम जाऊँगा।।
कभी तुम भी समझ लो अन्न के दाता की मजबूरी।।
तुम्हारे दर पे नितदिन मैं सिर को झुकाउँगा।।

भला क्यों उसकी  हालत पर दया तुमको नहीं आती।
बेशर्मी से भरी बातें तुम्हें क्यों शर्म न आती।
बना दी कैसी हालात है यहाँ की राजनीति ने।
किसानी ऐसा रस्ता है कभी मंजिल नहीं आती।।

फसल सुखी लगा उसको लटक वो पेड़ से जाए।
हुई बारिश भयंकर जब वो रोता मेड़ से आए।।
जो थोड़ा कुछ बचे दाने बिकी मंडी में है इज्जत।
मरे न अन्नदाता रो बताओ तुम कँहा जाए।।


बिका ईमान है तेरा नजर  फसलें नहीं आतीं।
बहुत बातें यंहा होतीं मगर असलें नहीं आती।।
न जाने क्यों तुम्हें नफरत हुई मेरे किसानों से।
बने क्यों मुर्ख फिरते हो तुम्हें अकलें नहीं आतीं।।

किसानों की बुरी हालत बताओ दोष किसका है।
तुम्हें जो पलता भू पर नहीं अफ़सोस उसका है।।
जरा भी शर्म आती तो तुम्हें एहसास ये होता।
तुम्हारी इस सफलता में बताओ वोट किसका है।।

समर्पण राष्ट्र भक्ति का चलो तुमको दिखाऊं मैं।
भरे जो पेट जन जन का वही भूँखा दिखाऊँ मैं।।
जरा तुम भी घुसो कीचड़ में आकर संग तो मेरे।
हैं कितने जहन में छाले चलो तुमको दिखाऊँ मैं।।


सर्वाधिकार सुरक्षित
©®योगेश योगी किसान
योगेश मणि सिंह

बुधवार, 24 जून 2020

कोरोनिल विरुद्ध एलोपैथिक

ध्यान से पढ़ियेगा बिना पढ़े कॉमेंट का कोई मतलब नहीं🙏🙏

कोरोनिल v/s एलोपैथिक सिस्टम

योग गुरु स्वामी रामदेव जी के  पतंजलि लिमिटेड ने #कोविड-19 की दवाई बनाकर सारे #विश्व को अपनी ओर खींचा जिसमे स्वामी रामदेव जी ने दावा किया है कि उनकी यह दवाई पूर्णतः परीक्षणों से गुजरी हैऔर इसके देश भर में #क्लीनिकल पेशेंट ट्रायल किये गए हैं और यह सब उनके संस्थान #पतंजलि_अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों की देखरेख में हुआ है। इसके बाद ही यह दवाई देश मे लाँच की गई है।
पतंजलि लिमिटेड ने अपने आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स के दम पर देश मे ही नहीं वरन वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाई है।
आयुष मंत्रालय ने अचानक से बाबा रामदेव के संस्थान की इस कोरोनिल दवाई, जिसका दावा किया जा रहा है कि यह कोरोना के पेशेंट पर कारगार है, के विज्ञापन और बिक्री पर रोक लगाई है, हालाँकि देखा जाए तो #सुसुप्तावस्था में पड़े इस विभाग ने बड़ी जल्दी ही मामले को संज्ञान में लिया।
हालाँकि यह इतना आसन नहीं है #देश में जो दिख रहा है वह होता नहीं है और जो होता है वह दिखता नहीं है।
सरकार #देशी ब्रांड और मेड इन इंडिया #स्वदेशी अपनाओ को बढ़ावा देती है वंही दूसरी ओर  सीधे सीधे #गर्दन पकड़कर मरोडती है।
यह सर्व विदित है कि #कोरोना का असर उन पर ज्यादा  होता है जिनका #इम्यून_सिस्टम कमजोर है। और हकीकत यही है कि कोरोना का सारा खेल इम्यून सिस्टम पर ही टिका है वरना जिसे कोरोना हुआ वह ज़िंदा नहीं बचता। और यह दवा कोरोनिल इसी इम्यून सिस्टम को तगड़ा बनाती है।
मेरे एक मित्र अंतर्राष्ट्रीय फार्मा कंपनी में #क्वालिटी_कंट्रोलर हैं, उन्होंने बताया कि एलोपैथिक एक मीठा जहर है जिसका उद्देश्य माइंड डायवर्ट करना है कुछ मामलों में इंसान अपनी क्षमताओं(इम्यून सिस्टम) से ही ठीक होता है फिर श्रेय कोई भी ले। उनका कहना यह है कि अगर आपका इम्यून सिस्टम तगड़ा है तो कोरोना आपको छू कर भी निकल जायेगा और आपको पता भी नहीं चलेगा वह आपके इम्यून सिस्टम पर हावी हो ही नहीं पायेगा।

#एलोपैथिक ने देश को इस कदर अपने कब्जे में लिया है कि लोग एक छींक आने जरा सा सिरदर्द होने पर सीधे मेडिकल स्टोर और डॉक्टर की तरफ भागते हैं। और एक कंपनी में मुझे भी कभी काम करने के सौभाग्य प्राप्त हुआ था, मैंने देखा कि कैसे 2 रुपये की लागत वाली दवाई ग्राहक(मरीज) तक 200 मे पहुँचती है इसमें सबके हिस्से तय होते हैं इस खेल में सत्ता में बैठे इस डीपार्टमेंट के लोगों से लेकर, सीएंडेफ,डीलर, सप्लायर, एमआर,मेडिकल, डॉक्टर सब शामिल हैं, #गेम बहुत लंबा है जिसे समझना इतना आसान नहीं। अपने प्रोडक्ट को है लाइट करने बड़े बड़े रिसर्चर डॉक्टर्स वैज्ञानिकों की  किताबो में एक छोटे से नाम और डिस्क्रिप्शन के लिए ये कंपनियां लाखों करोड़ों खर्च करती हैं, विदेश खर्च, सूरा-सुंदरी तो आम बात है यह तो छोटी छोटी मीटिंग्स में ही हो जाता है।
आज #आयुष_मंत्रालय नींद से ऐसे ही नहीं जगा इसे जगाया गया है क्योंकि अगर यह ऐसे ही सोता रहता तो जल्द देश की ये पतंजलि लिमिटेड विश्व की बहुत बड़ी #आयुर्वेदिक कंपनी होती, एलोपैथिक वाले यह सब जानते हैं कब किसके सैम्पल पास होने देना है और कब नहीं यह सब उन पर ही डिपेंड करता है, उनके व्यक्ति हर जगह हैं सरकार में भी हैं और बाहर भी।
कोरोनिल दवाई पर जो इम्युनिटी बढ़ाने का दावा करती है  हो सकता है जल्द ही रोक लग जाये और इसके #सैंपल भी #फेल हो जाएं लेकिन इतना समझ लीजिए कि बाबा भले ही व्यापारी हो सकता है लेकिन देश का एक नाम है और एक ब्रांड है जिसने अपने अनुसंधान की दम से #विदेशी कंपनियों की कमर तोडी है और पतंजलि के प्रोडक्ट अगर फेल भी होते हैं तो याद रखिये बाबा के प्रोडक्शन के अंदर भी #एलोपैथिक वाले #एजेन्ट घुस चुके हैं जिनका उद्देश्य ही वही करना है जो विदेशों में बैठे उनके आका और देश में बैठे उनके एजेंट करते हैं।
याद रखो बाबा भले व्यापारी बन गया हो लेकिन शेयर देश का है किसी विदेशी कंपनी का नहीं और देश मे रहकर देश के लिए देश के लोगों के लिए व्यापार करना गलत नहीं, विदेशों में सप्लाई करना गर्व की बात है, इसलिए इस संस्थान का #विरोध का होना तो तय है।
देश के दिग्गज और सिस्टम में बैठे लोगों की आंखें तब नहीं खुलीं जब #ग्लेनमार्क कंपनी ने अपनी कोरोना के लिए 100 टेबलेट 13000 रुपए में लॉन्च की, बड़े बड़े विदेशी संस्थानों के साथ कोलाइब्रेशन में चल रहे अस्पताल जब कोरोना का एक दिन का चार्ज #लाखों में उसूलते हैं तब सिस्टम की आँख नहीं खुलती???
सोओ-सोओ रे सिस्टम और अपनों को #कुचलने के  लिए जागो, यही तो इस देश का #इतिहास रहा है।
अंततः "घर की मुर्गी दाल बारबार"

#कोरोनिल
#पतंजलि_लिमिटेड
#स्वामी_रामदेव

©®योगेश योगी किसान
लेख सर्वाधिकार सुरक्षित
#स्वामीनाथन_रिपोर्ट_लागू_करो

मंगलवार, 23 जून 2020

चीन पर कविता

सोच रहा था नहीं लिखूँगा, दो कौड़ी पंचफुटिये पर।
इसकी मैं हर बात को रखता, नोकों वाले जुतिये पर।।
लेकिन अब तो हद हो बैठी, हमको आँख दिखाता है।।
शायद च्याउ भूल गया है, भारत से क्या नाता है।।
अरे! कान खोलकर सुन ले बेटा, हम भारत के बेटे हैं।
पैदा होते ही खतरों और अंगारों में खेले  हैं।।
शांति शांति के चक्कर मे धोखे से है वार किया।
पीठ के पीछे धोखा देकर, कीलों से प्रहार किया।।
इस गुमान में मत रहना की,  सैनिक तुमने मारे हैं ।
हमने सैनिक जानबूझकर, भारत माँ पर वारे हैं।।
एक-एक सैनिक का बदला, आज नहीं तो कल होगा।
नहीं लिया तो मातृभूमि और, माँ कोख से छल होगा।।
घर मे घुसकर इन चीनी की, शरबत अब बन जाने दो।
बहुत हो गया शांति स्वयंबर, एक युद्ध ठन जाने दो।।
इंच इंच वापस ले लो, अब समय नहीं समझाने का।
आँख दिखाए आँख फोड़ दो, समय नहीं रुक जाने का।।



गुरुवार, 18 जून 2020

शहीदों को शत शत नमन

जब इतनी तनातनी चल रही थी तो आखिर क्यों?  #सैनिको को बॉर्डर पर #निहत्थे रहने का आदेश दिया गया। देश का बेटा देश की #रक्षा के लिए जाता है राजनीति की भेंट चढ़ने के लिए नहीं..
सभी #शहीदों🇮🇳 को मेरी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। #रीवा के शहीद #दीपक_कुमार_गहरवार गर्व है आप जैसे विंध्य के सपूतों पर।

बॉर्डर पर सैनिक को बोला, निहत्थे तुम खूब लड़ो।
किसकी कारिस्तानी बोलो, कैसे इनको माफ करो।।
बॉर्डर पर क्या फूल उगे थे, जो इनको ये ज्ञान दिया।
दुनिया को दिखलाने खातिर, सैनिक को कुर्बान किया।
कब तक जग को बतालाओगे, शांति के हम साथी हैं।
इतनी लाशें रोज गिर रहीं, क्या तुझको नाकाफी हैं।।
प्रश्न पूँछता हर शहीद है, हम पर क्यों ट्रायल करते।
देश की घटिया राजनीति से,  भारत के बेटे मरते।।

गोली एक नहीं थी साहब, जिसको देखा सीने मे।
पीठ के पीछे भी गोली थी, खलल डाल दी जीने मे।।
दुश्मन की औकात नहीं, न हम उनसे थे हार गए।
दिल्ली की नाकामी है ये हिजड़े हमको मार गए।।
रात दिन जब नींद त्यागता, तब बेटा सैनिक बनता।
देश उसे प्यारा होता है, इसीलिए सेना चुनता।।
तेरे* बेटे और भतीजे, फौज नहीं चुन पाते हैं।
जरा बताओ सेना से वो, क्यों इतना कतराते हैं?
लूट-लूट कर देश को तुमने, कब्रिस्तान बना डाला।
राजनीति ने ही भारत का पाकिस्तान बना डाला।।
अब एक ऐसा नियम बना लो आने वाली सालों में।
जिसका बेटा सीमा में हो वही रहेगा चुनावों में।।

*राजनीतिज्ञों के

©®योगेश योगी किसान
#स्वामीनाथन_रिपोर्ट_लागू_करो
#जयहिंद_जयहिन्द_की_सेना
फ़ोटो-DB

रविवार, 10 मई 2020

माँ ही तो है जीवन मेरा

लिख दूँ माँ पर गीत में कैसे,
जिसने लिखा हो जीवन मेरा।
मैं हूँ उसका वो माँ मेरी,
माँ ही तो है जीवन मेरा।।



माँ ने जीवन को सिखलाया,
जीवन क्या है ये बतलाया।
सदा फिक्र वह मेरी करती,
जान न्योछावर मुझपे करती।
           लोरी गाती हुआ सवेरा।
           माँ ही तो है जीवन मेरा।।

घर से बाहर कभी रहूँ जब,
सोच मुझी पर रखती तब-तब,
सांस अटक जाती थी उसकी,
आंधी बारिश देख अंधेरा।।
       मैं हूँ उसका वो सब मेरा,
       माँ ही तो है जीवन मेरा।।

आँचल से वह चिपका लेती,
मानो शावक को दू देती,
कहती सोजा मेरे लाला,
नाजों से है उसने पाला,
           दिल मे उसके रहे बसेरा,
           माँ ही तो है जीवन मेरा।।
ममता का अंबार वही है।
मेरा घर दर द्वार वही है।
ईश्वर मेरा जन्नत मेरी।
करता हूँ सब ऊन्नत मेरी।
              रात वही है वही सवेरा।
              माँ ही तो है जीवन मेरा।।
रूठ कभी यदि मैं जाता हूँ।
खुद को तनहा जब पाता हूँ।
करती है वह  घना प्रेम तब।
अर्पण करती मुझपर सब वह।
             माँ जैसा न कोई मेरा।
             माँ ही तो है जीवन मेरा।।


©®योगेश योगी किसान
#स्वामीनाथन_रिपोर्ट_लागू_करो
#निजीकरण_बंद_करो


ईद मुबारक #Eidmubarak

  झूठों को भी ईद मुबारक, सच्चों को भी ईद मुबारक। धर्म नशे में डूबे हैं जो उन बच्चों को ईद मुबारक।। मुख में राम बगल में छुरी धर्म ध्वजा जो ...