बघेलखण्ड में एक कहावत है-"कौआ कान लईगा"
जिसने सुना बस वही रटने लगा, किसका कान ले गया ,क्यों ले गया,कब ले गया,ले जाने के पीछे प्रयोजन क्या है,कौआ कौन है, कँहा है ,कँहा रहता है, हम इनसब बातों को छोड़कर बिना सोचे समझे बस अपने कान छुपाने को दौड़ पड़ते हैं और दूसरों को भी कान छिपाने को प्रोत्साहित करते हैं।
हमारे देश मे अनादिकाल से समाज को भृमित करने वाले कई अन्धविश्वाश चलते चले आ रहे हैं,दुनिया जँहा हर ग्रह तक पहुंच गई है वंही हम नव ग्रहों को शान्त करने का उपचार ढूंढने में व्यस्त हैं,
ऐसे कई अंधविश्वास हैं जिनका वर्णन करना यानी कि 2 तीन दिन लगातार लिखना, ख़ैर..
सवाल ये पैदा होता है कि ,जब आज हर हाथ मे मोबाइल है इंटरनेट है फिर भी लोग आंखे मूँदने को विवस हैं इसका कारण है-'अधजल गगरी छलकत जाय'
यानी कि ज्ञान तो है पर अधूरा है, लोग आज भी पानी बरसने को चमत्कार मानते है और भी बहुत सी चीजें हैं, मैने बहुत से वैज्ञानिकों की जीवनी पढ़ी मैने देखा कि बैज्ञानिकों को ईश्वर पर विश्वास नही होता वो नास्तिक होते हैं और उन्ही के द्वारा उनकी खोजों के द्वारा आज हम आधुनिकता में आये, दूसरी ओर हम आस्तिक होकर भी कोई खोज नही कर सके, हम आस्तिक होकर भी डर के परे न जा सके , बहुत गंभीरता से सोचने की जरूरत है?
सबसे ज्यादा ईश्वर(33करोड़) भारत मे ही हैं और सबसे ज्यादा अंधविश्वास और डर भी यही है। ये भी विचारणीय बात है।
कोई भी अफवाह फैलती क्यों है,
या तो सुरु करने वाला जानता है या फिर इसके पीछे भी कोई साजिश छुपी होती है।
अच्छा हमेशा ऐसा आडम्बर पिछड़ी जातियों में ही होता है ऐसी घटनाएं हमेशा गांवों या शहरों के पिछड़े इलाके से शुरू होती हैं और इन्ही पिछड़ी जातियों के मध्य चलती रहती हैं।
कभी मुँह नोचने वाली अफवाह तो कभी पत्थर टाँकने वाला राक्षस, तो आज चोटी काटने वाली अफवाह, bpl वालों से शादी करने की अफवाह।
इन अफवाहों का सोर्स हमेशा M2M यानी कि mouth(मुँह) to(से) mouth(मुँह) ही फैलती हैं।
लोग इसके पीछे की सच्चाई जाने बिना इसके डर को दिलों में समाहित कर लेते हैं।
प्रश्न ये उठता है कि भारत की ऐसी जनता को विकाश की क्या जरूरत है क्योंकि इनको तो अंधी चीजों पर ही विश्वाश है।
इनके दिलों का डर इतना है कि ये किसी की सुनने को तैयार नही है, हाँ इन सबसे रक्षा के लिए इन्होंने खुद के नए नए अंधविश्वास जरूर बना लिए है मसलन दीवाल पर पंजा,नीम ,मिर्ची, फूल आदि आदि।
घटनाएं यदि हो भी रही हैं तो और ज्यादा अन्धविस्वास फैलाने की जरूरत नही है उसकी तह तक जाने की जरूरत है।
©लोधी योगेश मणि योगी
कवि लेखक
http://yogeshmanisinghlodhi.blogspot.in/
जिसने सुना बस वही रटने लगा, किसका कान ले गया ,क्यों ले गया,कब ले गया,ले जाने के पीछे प्रयोजन क्या है,कौआ कौन है, कँहा है ,कँहा रहता है, हम इनसब बातों को छोड़कर बिना सोचे समझे बस अपने कान छुपाने को दौड़ पड़ते हैं और दूसरों को भी कान छिपाने को प्रोत्साहित करते हैं।
हमारे देश मे अनादिकाल से समाज को भृमित करने वाले कई अन्धविश्वाश चलते चले आ रहे हैं,दुनिया जँहा हर ग्रह तक पहुंच गई है वंही हम नव ग्रहों को शान्त करने का उपचार ढूंढने में व्यस्त हैं,
ऐसे कई अंधविश्वास हैं जिनका वर्णन करना यानी कि 2 तीन दिन लगातार लिखना, ख़ैर..
सवाल ये पैदा होता है कि ,जब आज हर हाथ मे मोबाइल है इंटरनेट है फिर भी लोग आंखे मूँदने को विवस हैं इसका कारण है-'अधजल गगरी छलकत जाय'
यानी कि ज्ञान तो है पर अधूरा है, लोग आज भी पानी बरसने को चमत्कार मानते है और भी बहुत सी चीजें हैं, मैने बहुत से वैज्ञानिकों की जीवनी पढ़ी मैने देखा कि बैज्ञानिकों को ईश्वर पर विश्वास नही होता वो नास्तिक होते हैं और उन्ही के द्वारा उनकी खोजों के द्वारा आज हम आधुनिकता में आये, दूसरी ओर हम आस्तिक होकर भी कोई खोज नही कर सके, हम आस्तिक होकर भी डर के परे न जा सके , बहुत गंभीरता से सोचने की जरूरत है?
सबसे ज्यादा ईश्वर(33करोड़) भारत मे ही हैं और सबसे ज्यादा अंधविश्वास और डर भी यही है। ये भी विचारणीय बात है।
कोई भी अफवाह फैलती क्यों है,
या तो सुरु करने वाला जानता है या फिर इसके पीछे भी कोई साजिश छुपी होती है।
अच्छा हमेशा ऐसा आडम्बर पिछड़ी जातियों में ही होता है ऐसी घटनाएं हमेशा गांवों या शहरों के पिछड़े इलाके से शुरू होती हैं और इन्ही पिछड़ी जातियों के मध्य चलती रहती हैं।
कभी मुँह नोचने वाली अफवाह तो कभी पत्थर टाँकने वाला राक्षस, तो आज चोटी काटने वाली अफवाह, bpl वालों से शादी करने की अफवाह।
इन अफवाहों का सोर्स हमेशा M2M यानी कि mouth(मुँह) to(से) mouth(मुँह) ही फैलती हैं।
लोग इसके पीछे की सच्चाई जाने बिना इसके डर को दिलों में समाहित कर लेते हैं।
प्रश्न ये उठता है कि भारत की ऐसी जनता को विकाश की क्या जरूरत है क्योंकि इनको तो अंधी चीजों पर ही विश्वाश है।
इनके दिलों का डर इतना है कि ये किसी की सुनने को तैयार नही है, हाँ इन सबसे रक्षा के लिए इन्होंने खुद के नए नए अंधविश्वास जरूर बना लिए है मसलन दीवाल पर पंजा,नीम ,मिर्ची, फूल आदि आदि।
घटनाएं यदि हो भी रही हैं तो और ज्यादा अन्धविस्वास फैलाने की जरूरत नही है उसकी तह तक जाने की जरूरत है।
©लोधी योगेश मणि योगी
कवि लेखक
http://yogeshmanisinghlodhi.blogspot.in/
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