शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

दो कौड़ी के #मुसलमान_बाबर_कादरी को #हिंदुस्तान_मुर्दाबाद बोलने पर उसको हजारों जूते मारती और औकात बताती
मेरी रचना-



सुन ले बाबर कान खोलकर नारे गलत लगाएगा,
जूते चप्पल बहुत हुए चौराहे पर टाँगा जाएगा,
तेरी इतनी जुर्रत कैसे नमक हरामी करता है,
खाता पीता इसी देश का पाक परस्ती करता है,
मुर्दाबाद बोलकर तूने भारत का अपमान किया,
कैसे सुनने वालों तुमने सुनकर कड़वा घूँट पिया,
मुझे शर्म आती है भड़वे अब तक कैसे ज़िंदा है,
तेरे पक्ष में जो बोलेगा वो भी तेरा वाशिंदा है,
तुझको मारेंगे हम सुनले अगर नजर आ जायेगा,
जो बोलेगा तेरी भाषा वो संग कुचला जाएगा,
तुझ जैसे नाजायज भड़वे भारत मे क्यों रहते हैं,
गोली मारो कुत्तों को जो उल्टा सीधा कहते हैं,
इनका वतन साफ दिखता है पाकिस्तानी भाषा है,
इन जैसों की बोटी बोटी मोदी तुमसे आशा है,
कँहा गए हो राष्ट्रवादियों छूप कर क्यों अब बैठे हो,
या फिर खाली हवा हवाई बातों पर ही ऐठे हो,
देश बंद बस राजनीति के कारण ही क्या होता है,
ऐसी बहकी बातों पर क्यों खून गरम न होता है,
घर मे इसके घुस जाने का आंदोलन हो जाने दो,
या फिर अपना भगवा छोड़ो कालिख यूँ पुत जाने दो,


भारत माता की जय
इंकलाब जिंदाबाद
जय जवान जय किसान

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रचनाकार
©® योगेश मणि योगी
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