मंगलवार, 2 जनवरी 2018

पटवारी की होड़ मची है सबको बनने पटवारी,
ऐरे गैरे नत्थू खैरे चाहिये नौकरी सरकारी,
काका-काकी,चाचा-चाची सबने करो अवेदन है,
कहते घर को काम न कहियो हाथ जोड़ निवेदन है,
बहु-सास ने साथ में भर दओ कर्री चल रई तैयारी,
मोड़ा-मोदी सेटिंग जमा रये कैसे बनने पटवारी,
पटवारी की आड़ में चल रई घर वारन से गद्दारी,
जिओ फ़ोन में गप्पें चल रई ऐसे हो रई तैयारी,
शिवराज के राज में देखो पटवारी की धूम मची,
अंधी होके सारी जनता नाचे देखो गली गली,
डीजे में भी गाना सुनलो पटवारी को बज रओ है,
झूठ बोलकर दुल्हनिया से दूल्हा घोड़ी चढ़ रओ है,
रोजई पेलम-पेल मची है कोचिंग कोचिंग जावे की,
पटवारी आसान समझ रए गप्प से हलुवा खाबे की,
सालन से जो लगे हते बस ओई बाज़ी मार रहे,
बाकी टाइम पास करें है सुन लो सबरे हार रहे,
हमरी सुन लो तुक्का से तुम कोउ न बनहो पटवारी,
जो व्यापम की आय परीक्षा नोई कोनऊ दरबारी,
हमहुँ सब के साथ मे विनती करबी बनबे पटवारी,
काहे से की मक्कारी की नौकरी होती सरकारी,

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कवि लोधी योगेश मणि 'योगी'

शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017

चीरा धरती का सीना है सबकी भूख मिटाने को,
भूखा कैसे मैं सो जाता शब्द नही समझाने को,
मुझको फसल मेरी बेटे सी रोज दिखाई देती है,
पाला-पोषा कैसे मैंने, क्या तुम्हे दिखाई देती है,
हो जाती जब रात तुम्हारी मेरी सुबह तभी होती,
मेरी किसानी की किताब में कोई पहर नही होती,

चंद पंक्तियाँ  मेरी कविता✍ "किसान का दर्द" से....
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©®योगेश मणि योगी

सोमवार, 9 अक्टूबर 2017

जब सबूतों के अभाव में दोषी बच जाते हैं और रशूख न होने के कारण आम आदमी को न्याय नही मिलता तब भारत का सिस्टम 2 कौड़ी की रखैल नजर आता है-
अपने माता पिता के हत्यारों को जब एक बेटी सजा नही दिलवा पाती सिस्टम जो पैसों और पावर का गुलाम है से हार जाती है और आत्महत्या कर लेती है तब लगता है कि भारत की उन्नति कभी नही हो सकती।
मेरी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ चंद पंक्तियाँ-

मत रो की तूने जन्म लिया है महान देश मे,
तन नंगा है,पेट भूखा जीता जा परिवेश में,
बिका है जो अमीरों के हाथों में सिस्टम,
न्याय किसको मिला है अब तक इस देश में,
पैसा पॉवर चलता हैं कोठों में अदालत की,
मुजरा करता हैं कानून तवायफ के भेष में,
ऐसे ही घुट घुट कर मरोगे गरीब हो तुम,
क्योंकि राजनीति भृष्टनीति हावी है देश मे,


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©® योगेश मणि 'योगी'


शनिवार, 30 सितंबर 2017

ये पैदा कँहा से हुवा होगा..
बोलो..
इसको बाप की जरूरत क्या थी?
बोलो...
हमारे देश प्रचीन है कोई शक नही?
ये tv पर live और माइक पर क्यों बोलता है?
बोलो...
जंगल जाकर क्यों नही आध्यत्म करता?
बोलो...
मंहगी मंहगी गाड़ियों से क्यों चलता हैं? पैदल चले
बोलो...
विदेश जाने के लिए हवाई जहाज का उपयोग क्यों करता है?
बोलो...
आंख बंद करके प्राचीन तरीक़े से भी जा सकता है?
बोलो...
ये देश को बांट रहा है और जनता इसकी चाट रही है?
बोलो......
बोलो....मेरे देशवासियों ..बोलो


©®कॉपीराइट लेख
योगी योगेश मणि
Blog से अवतरित
yogeshmanisinghlodhi@blogspot.in
जिसने जब जब बोला झूठ,
उसका भरम गया है टूट,
रावण मर्दन राम करेगें,
बाकी तो बदनाम करेंगे,
प्रभु राम के गुण तो लाओ,
तब मोदी जी धनुष उठाओ,
झूठ राम ने कभी न बोला,
जनमानस से कभी न खेला,
रघुकुल रीत वचन न जाई,
मोदी तुम उल्टे हो भाई,
प्रभु राम न माफ करेंगे,
लिख लो सत्ता साफ करेंगे,

😂😂😂

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कवि योगेश मणि योगी

शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

एक कोसिस तुम करो अब एकता के लिए,
दुश्मनों के घर को तुम अपना बनाना छोड़ दो,

नित्य हमले हो रहे हों देश के उत्थान पर,
प्यार में डूबी सुनो गजलें बनाना छोड़ दो,

तोड़कर कैसे भला खुस रह सकेंगे देश को,
राज अपने दुश्मनों को तो बताना छोड़ दो,

बिक न जाये देश की खुशियां कंही चौबारे पे,
जिद को अपनी छोड़ या की वतन को छोड़ दो,


रह सकें हम सो सकें निस्फिक्र अब तो रात में,
मान जाओ कह रहे अब बम बनाना छोड़ दो,

क्या मिलेगा मार कर तुमको बताओ तो भला,
ईद की खुशियों में तो कुर्बानियों को छोड़ दो,

©®योगी

सोमवार, 28 अगस्त 2017

शीर्षक -नदिया की महिमा समझाऊँ          

                       आओ तुमको गीत सुनाऊँ,
                       नदिया की  महिमा समझाऊँ,
जीवन की यह भाग्य विधाता।
जन्मों का है इससे नाता।।
इसके जल से हरियाली है।
पूरे जग में खुशहाली है।।
कल-कल,छल-छल निर्मल बहता।
इसके जल से जीवन चलता।।
                   कितने गुण मैं तुम्हे बताऊं,
                   नदिया की महिमा समझाऊँ,

अगर नहीं नदिया होतीं तो?
सारे जग में बंजर होता।।
न मैं होता न तुम होते ,
न ये सारा जीवन होता।।
आज मगर हम भूल गए हैं।
अहंकार में डूब गए हैं।।
                    जल की कीमत क्या बतलाऊँ,
                    नदिया की महिमा बतलाऊँ,
आओ मिलकर इन्हें बचाएं।
पर्यावरण का साथ निभाएं।।
जल में कचरा न फैलाएं।
प्रदूषण से इसे बचाएं।।
                    बार-बार मैं यही बताऊँ
                    नदिया की महिमा समझाऊँ,
                    नदिया की महिमा.......

©®योगी योगेश
सर्वाधिकार सुरक्षित

ईद मुबारक #Eidmubarak

  झूठों को भी ईद मुबारक, सच्चों को भी ईद मुबारक। धर्म नशे में डूबे हैं जो उन बच्चों को ईद मुबारक।। मुख में राम बगल में छुरी धर्म ध्वजा जो ...