सोमवार, 23 सितंबर 2019

देश जागरण करने वाले काव्य के पुरोधा राष्ट्र गौरव #रामधारी_सिंह_दिनकर जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।
एक रचना समर्पित-

लिखता हूँ मैं देश का #वंदन, लिखता जन की पीर को।
लिखता हूँ #किसान की माटी, लिखता सीमा के वीर को।।
लिखता हूँ मैं #राजनीति से, उपजे देश के छालों को।
जाति #व्यवस्था के सीने पर, पार हुए उन भालों को।।
लिखता हूँ मैं नींव का पत्थर, #दबी हुई आवाजों को।
जो जनता को हक़ न देते, लिखता उन #सरताजों को।।
जब तक भारत मे #शोषण है, बात लिखूँ अपमानों की।
गाथा कैसे कलम लिखेगी, चाटुकार #बेईमानों की।।
मैं #दिनकर का वंशज हूँ, मैं #संविधान की बात करूँ।
माँ शारद ने जिम्मा सौंपा, कैसे मैं #आघात करूँ।।
सुन लो कोई #कवि नहीं, दर्दों को गाने वाला हूँ।
माँ के दामन का जिम्मा है, उसका मैं #रखवाला हूँ।।
समरसता जब न मिलती तब, #इंकलाब लिख जाता हूँ।
जनमानस की #पीड़ा को तब, मैं शब्दों में गाता हूँ।।

©®योगेश योगी किसान

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सोमवार, 5 अगस्त 2019

आज जिसने जिसने 370 का विरोध किया उनकी एक लिस्ट सार्वजनिक तैयार होनी चाहिए चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, और सभी LoC में एकत्रित करके डायनामाइट लगा कर उड़ा देना चाहिए, ताकि दुनिया देखे की भारत गद्दारों के साथ क्या करता है। सुवर के नाजायजों,हरामीयों सीधी बात देशद्रोहियों की कमी नहीं है हिंदुस्तान में उनको जवाब देती और देश के शौर्य का गुणगान करती मेरी रचना।



लाखों शीश चढ़ा देंगे हम देश तेरे आह्वान पर।
माँ का मस्तक नहीं झुकेगा कमी न होगी शान पर।।

मोदी की सेना ने अबकी देश को एक बनाया है।
कश्मीर से दक्षिण तक इक संविधान चलाया है।।

धारा 370 का यह दाग देश पर धब्बा था।
चाहने वाले इसको सुनलें पाक तुम्हारा अब्बा था।।

कश्मीर जागीर नहीं है सुनो किसी के बाप की।
फन जिसका ऊपर निकलेगा कुचलेंगे उस सांप की।।

महबूबा हो या  फारुख हो सुन ले नहीँ निवेदन है।
बार बार जो समझाते थे न ही वो प्रतिवेदन है।।

अबकी तुमको जाना होगा पाक तुम्हारा देश है।
कश्मीर में नहीं इंच भर धरा तुम्हारी शेष है।।

LOC की बात छोड़ दो इंच इंच गारत कर देंगे।
कराची इस्लामाबाद पेशावर पूरा भारत कर देंगे।।

गले लगाया कश्मीर को तब-तब पत्थर खाए हैं।
अब आँसू दिखलाते क्यों हो तब क्यों नहीं बहाए हैं।।

एक एक पत्थर का सुन लो हिसाब किया है मोदी ने।
अलगावी जेहादी सुन लें जवाब दिया है मोदी ने।।

अभी वक्त है चरण थाम लो गले लगाकर देख लिया।
हमने भी है वक्त से सीखा घावों को अब सेंक लिया।।

जो जैसा अब बोलेगा उसको वैसा इनाम मिले।
तमगे जूते गोली लायक जैसा जो सम्मान मिले।।

शुरुवात है स्वर्णिम युग की शहंशाह अब बोला है।
इक-इक करके कामों वाला नया पिटारा खोला है।।

होगा नव निर्माण देश का सब्र करो यह जान लो।
भारत विश्व गुरु अब होगा बात मेरी तुम मान लो।।

कहता योगी देश बड़ा ,जन-जन का  ये सम्मान है।।
तन मन धन हर जन्म मेरा सबकुछ इस पर कुर्बान है।।


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©®योगेश योगी किसान

मंगलवार, 18 जून 2019

पहले उप्र फिर बिहार फिर सूरत फिर बिहार अगला स्थान क्या आपका शहर या गाँव...बच्चों की लगातार मौत से दिल आहत हुआ बस शब्द निकल पड़े😭

मरते बच्चे देख रहे हो, दर्द हुआ या नही हुआ।
हेरोइन जब मरती है तब, दुख में साहब ट्वीट हुआ।।
देश चाहता बुलेट नहीं है, न ही मंदिर मस्जिद अब।
बच्चे सब मर जाएंगे तो, पूजा होगी कैसे कब।।
बुनियादी सुविधाएं रोएं, शिक्षा स्वास्थ्य बड़ी घटिया।
देशभक्ति का रंग चढ़ा कर, बातों से डालो पटिया।।
नहीं जरूरत मंगल जाना, न बुलेट ट्रेन की बातें हो।
लाल मेरे ज़िंदा रह जाएं, चैन से उनकी रातें हो।।
ऑक्सीजन कि कमी से मर गए, गोरखपुर हम भूल गए।
सूरत में किस कमी से बच्चे, सीधे छत से कूद गए।।
देखो हाल बिहार का साहब, दो बारी दुहराया है।
एसी में बैठे प्लानर को, अब तक समझ न आया है।।
क्यों होती हैं मौतें इतनी, बच्चे मरें किसान मरें।
बिना युद्ध के रोज रोज ही, सीमा पर जवान मरें।।
बच जाए यदि बेटी तो, कब लूट जाएगी पता नहीं।
कुछ हठधर्मी कहते हैं कि, घटना है यह खता नहीं।।
संताने यदि होती तो, शायद तुम दर्द समझ पाते।
एक बच्चे के मर जाने पर, बदहवास से हो जाते।।
खुद के लिए सैलरी भत्ता, रोज रोज बढ़वाते हो।
राष्ट्रभक्ति जब करते हो सब, क्यों वेतन ले जाते हो।।
इस वेतन से ही कुछ कर दो, शायद मौतें रुक जाएँ।
राष्ट्रवाद की जय-जय होगी, नतमस्तक सब हो जाएँ।।
ऐसा ही गर चला तो साहब, बच्चे सब मर जाएँगे।
सीमा पर लड़ने को सैनिक, कहो कँहा से लाएँगे।।



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©®योगेश योगी किसान

मंगलवार, 4 जून 2019

बुलेट नहीं जनरल ट्रेन लाओ

जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई,
एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़।
दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था।
जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है।
टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।
" ये जनरल टिकट है।अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना।वरना आठ सौ की रसीद बनेगी।"
कह टीसी आगे चला गया।
पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।
सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे।
 बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे।
 लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे।
" साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।"
टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।
" सौ में कुछ नहीं होता।आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।"
" आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।" अबकि बार पत्नी ने कहा।
" तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक की रसीद बना देता हूँ, दोनों बैठे रहो।"
" ये लो साब, रसीद रहने दो।दो सौ रुपये बढ़ाते हुए आदमी बोला।
" नहीं-नहीं रसीद दो बनानी ही पड़ेगी।देश में बुलेट ट्रेन जो आ रही है।एक लाख करोड़ का खर्च है।कहाँ से आयेगा इतना पैसा ? रसीद बना-बनाकर ही तो जमा करना है।ऊपर से आर्डर है।रसीद तो बनेगी ही।
चलो, जल्दी चार सौ निकालो।वरना स्टेशन आ रहा है, उतरकर जनरल बोगी में चले जाओ।"
इस बार कुछ डांटते हुए टीसी बोला।
आदमी ने चार सौ रुपए ऐसे दिए मानो अपना कलेजा निकालकर दे रहा हो।
 पास ही खड़े दो यात्री बतिया रहे थे।
" ये बुलेट ट्रेन क्या बला है ? "
" बला नहीं जादू है जादू।बिना पासपोर्ट के जापान की सैर। जमीन पर चलने वाला हवाई जहाज है, और इसका किराया भी हबाई सफ़र के बराबर होगा, बिना रिजर्वेशन उसे देख भी लो तो चालान हो जाएगा। एक लाख करोड़ का प्रोजेक्ट है। राजा हरिश्चंद्र को भी ठेका मिले तो बिना एक पैसा खाये खाते में करोड़ों जमा हो जाए।
सुना है, "अच्छे दिन " इसी ट्रेन में बैठकर आनेवाले हैं। "
उनकी इन बातों पर आसपास के लोग मजा ले रहे थे। मगर वे दोनों पति-पत्नी उदास रुआंसे
ऐसे बैठे थे ,मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके शोक  में जा रहे हो।
कैसे एडजस्ट करेंगे ये चार सौ रुपए?
 क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा?
नहीं-नहीं।
आखिर में पति बोला- " सौ- डेढ़ सौ तो मैं ज्यादा लाया ही था। गुड्डो के घर पैदल ही चलेंगे। शाम को खाना नहीं खायेंगे। दो सौ तो एडजस्ट हो गए। और हाँ, आते वक्त पैसिंजर से आयेंगे। सौ रूपए बचेंगे। एक दिन जरूर ज्यादा लगेगा। सेठ भी चिल्लायेगा। मगर मुन्ने के लिए सब सह लूंगा।मगर फिर भी ये तो तीन सौ ही हुए।"
" ऐसा करते हैं, नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न, अब दोनों मिलकर सौ देंगे। हम अलग थोड़े ही हैं। हो गए न चार सौ एडजस्ट।"
पत्नी के कहा।
 " मगर मुन्ने के कम करना....""
और पति की आँख छलक पड़ी।
" मन क्यूँ भारी करते हो जी। गुड्डो जब मुन्ना को लेकर घर आयेंगी; तब दो सौ ज्यादा दे देंगे। "
कहते हुए उसकी आँख भी छलक उठी।
फिर आँख पोंछते हुए बोली-
" अगर मुझे कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी-"
 इतने पैसों की बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय, इतने पैसों से हर ट्रेन में चार-चार जनरल बोगी लगा दो, जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हुए भी जलील होना पड़े और ना ही हमारे मुन्ने के सौ रुपये कम हो।"
उसकी आँख फिर छलक पड़ी।
" अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं, हमें
मोदीजी को वोट देने का तो अधिकार है, पर सलाह देने का नहीं। रो मत।

(विनम्र प्रार्थना है जो भी इस कहानी को पढ़ चूका है उसे इस घटना से शायद ही इत्तिफ़ाक़ हो पर अगर ये कहानी शेयर करे ,कॉपी पेस्ट करे ,पर रुकने न दे शायद रेल मंत्रालय जनरल बोगी की भी परिस्थितियों को समझ सके। उसमे सफर करने वाला एक गरीब तबका है जिसका शोषण चिर कालीन से होता आया है।)

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

कश्मीर की महबूबा को चेतवानी देती मेरी रचना

कश्मीर में आतंकियों की पोषक #महबूबा को चेतवानी देती मेरी रचना-

भारत के तिरंगे को गर धोखे से हाथ लगाओगी।
महबूबा अबकी इश्क नहीं गर्दन अपनी कटवाओगी।।

गद्दारी की जात देख लो फिर महबूबा बोली है।
भारत को धमकी देने में जुबा न उसकी डोली है।।
कैसे कैसे साँप पले हैं भारत की इस माटी पर।
आग लगाने तुले हुए हैं पुरखों की परिपाटी पर।।
2 कौड़ी की महबूबा ने फिर अपनी जात बताई है।
आतंकी की लड़की है उसने औकात दिखाई है।।
जैसा जिसका बाप रहा हो वैसी उसकी फसल हुई।
कुत्तों के घर कुत्ते होते घोड़ों की न नसल हुई।।
कश्मीर में आतंकी के आका की ये बोली है।
खून से छाती लाल करो ये आतंकी की टोली है।।
कश्मीर न बाप का इसके भारत का सम्मान है।
घाटी के चप्पे चप्पे पर बसता हिदुस्तान है।।
जुबा नहीं क्यों काटी इसकी जिंदा नहीं जलाया क्यों?
झंडे को जब गाली दी तो गरदन नहीं उड़ाया क्यों?
इन जैसे गद्दारों के ही कारण सैनिक मरता है।
गठबंधन क्यों इन भड़वों से सत्ता खतिर करता है।।
महबूबा को आज बता दो घर मे घुस कर मारेंगे।
आँख उठी जो भारत पर तो दोनों आखँ निकालेंगे।।
घाटी के शैतानों को अब खत्म तुम्हें करना होगा।
पाक परस्ती वाले लोगों से पहले लड़ना होगा।।
बहुत हो चुका खत्म करो महबूबा मुफ्ती का किस्सा।
भरकर पीतल सीने लिख दो भारत का ये है हिस्सा।।


©®योगेश योगी किसान
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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

पुलवामा में जवानों के काफिले पर हमला कई जवान शहीद, आखिर कब तक??
मेरी अश्रुपूरित #श्रद्धान्जलि उन अमर #शहीद सैनिकों को ,और उनके परिवारजनों की ओर से सुनी कोखों और कलाइयों का दर्द आपके सामने , *शेयर करें अगर देश से प्यार है ताकि फिर एक सर्जीकल स्ट्राइक हो*
💐💐💐

बहुत हो रहा समझौता इन दो कौड़ी के नागों से।
फिर कहता हूँ न हल निकलेगा मीठी मीठी बातों से।।
घर मे घुसकर इनको मारो दम दिखलाओ मोदी जी।
या फिर सत्ता करो हवाले सैनिक को तुम मोदी जी।।
राजनीति के बस में कुछ न राजनीति ही दिखती है।
देश भूलकर सारी कोशिस मुद्दों पर ही टिकती है।।
समझौता क्यों मुद्दों खातिर सैनिक की है लाशों से।
रोज रोज है कोख उजड़ती चरण चाटती बातों से।।
कुछ कुत्ते दाखिल हो जाते सीमा के दरवाजों से।
तेरे cctv कँहा गए क्या लगे हुए दरबारों में।।
कहते थे सीमा पर कोई नहीं परिंदा पर मारे।
एक के बदले 10 सर लेंगे लगते थे ऐसे नारे।।
कोख पूछती तुमसे है क्यों बार बार सैनिक मरता।
कहते रहते हो मोदी से अखिल विश्व हलहल कँपता।।
अगर इंच है 56 वाला तो दिखला दो मोदी जी।
दूध छठी का नामर्दों को चलो पिला दो मोदी जी।।
आगे आगे मैं जाऊँगा कसम सैन्य की खाता हूँ।
पाकिस्तान पर गर हमले का एक निमंत्रण पाता हूँ।।
एक बार घर मे घुस करके इनका दमन जरूरी है।
इनके काले मंसूबों पर काला कफन जरूरी है।।
बस इक मौका सेना को दो पाकिस्तान मिटाने का।
माँ का जितना दूध पिया है उसका कर्ज निभाने का।।

जय हिंद! जय भारत🇮🇳
©®योगेश योगी किसान
9755454999
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शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

ईद मुबारक #Eidmubarak

  झूठों को भी ईद मुबारक, सच्चों को भी ईद मुबारक। धर्म नशे में डूबे हैं जो उन बच्चों को ईद मुबारक।। मुख में राम बगल में छुरी धर्म ध्वजा जो ...